रायगढ़ में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के निराकरण पर सवाल, RTI और जवाब में अलग-अलग आंकड़े होने का दावा
प्रधानमंत्री आवास योजना की 16.45 लाख रुपये की राशि के खर्च का मामला; शिकायतकर्ता ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की
रायगढ़। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में दर्ज एक शिकायत के निराकरण को लेकर जनपद पंचायत रायगढ़ की आवास शाखा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में अधिकारियों द्वारा दिए गए जवाब में अंतर दिखाई देता है। इसे लेकर मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है।
प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि से जुड़ा मामला
मामला प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की आवास शाखा को प्राप्त राशि के मदवार उपयोग से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि शाखा को मिली करीब 16 लाख रुपये की राशि के खर्च में अनियमितता हुई और फर्जी बिलों के जरिए भुगतान किए जाने की आशंका है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

विभागीय जवाब में 16.45 लाख की राशि का उल्लेख
जनपद पंचायत रायगढ़ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी कार्यालय की ओर से 28 जुलाई 2026 को जारी पत्र में बताया गया कि जिला पंचायत से प्राप्त आवंटन राशि का आवश्यक कार्यों में नियमानुसार व्यय किया गया है।
पत्र में मदवार प्राप्त राशि ₹16,45,600 बताई गई है, जबकि मदवार व्यय का कुल योग ₹16,53,425 दर्शाया गया है। यानी प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार व्यय राशि प्राप्त राशि से ₹7,825 अधिक दिखाई दे रही है।
अलग-अलग मदों में खर्च का विवरण
पत्र में उपलब्ध जानकारी के अनुसार—
- 2023-24: आवास प्रगति/पूर्णता — ₹3,22,720
- 2023-24: ट्रेवल्स — ₹3,60,666
- 2024-25: उन्मुखीकरण एवं प्रचार-प्रसार — ₹6,28,675
- 2025-26: उन्मुखीकरण एवं प्रचार-प्रसार — ₹3,03,140
- 2025-26: ट्रेवल्स — ₹38,224
इन मदों को जोड़ने पर कुल व्यय ₹16,53,425 बताया गया है।
RTI और हेल्पलाइन के जवाब में अंतर का दावा
शिकायतकर्ता का कहना है कि RTI के माध्यम से प्राप्त दस्तावेजों में उपलब्ध जानकारी और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में दिए गए निराकरण के बीच कथित तौर पर अंतर है। इसी आधार पर शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि क्या यह महज रिकॉर्ड संबंधी त्रुटि है अथवा शिकायत के निराकरण में तथ्यों का सही तरीके से परीक्षण नहीं किया गया।
बिल-बाउचर और भुगतान अभिलेखों की जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि मामले की जांच में मूल बिल-बाउचर, वाउचर रजिस्टर, भुगतान अभिलेख, बैंक स्टेटमेंट, स्वीकृति आदेश और संबंधित कार्यों के दस्तावेजों का मिलान कराया जाए।
साथ ही RTI से प्राप्त दस्तावेजों और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में दिए गए जवाब की भी तुलना करने की मांग की गई है।
उच्चस्तरीय जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने स्थानीय स्तर पर जांच कराने के बजाय वरिष्ठ अधिकारियों या स्वतंत्र जांच एजेंसी से मामले की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि दस्तावेजों की विस्तृत जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आंकड़ों में अंतर का वास्तविक कारण क्या है और खर्च नियमानुसार हुआ या नहीं।
फिलहाल उपलब्ध आरोपों से किसी अधिकारी द्वारा जानबूझकर गलत जानकारी देने या वित्तीय अनियमितता किए जाने की पुष्टि नहीं होती है। मामले में मूल दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।












